Ashutosh_Shukla

मिल जाती तुम मुझको तो मैं कवि ना बनता..

13 Posts

2562 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 17580 postid : 732980

उपहार

Posted On: 16 Apr, 2014 कविता,Entertainment,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरे एक मित्र ने मुझसे बताया की वो अपनी गर्लफ्रेंड से अलग हो गया है और उसके सारे गिफ्ट्स लौटाना चाहता है…उसने मुझसे अनुरोध किया की उसके भेजने लायक कुछ लिखूं..

ना चाहते हुए भी लिखना पड़ा क्यूकी दोस्त तो आख़िर दोस्त हैं…


मुझको कर देना माफ़ प्रिये

ये बोझ नही रख सकता मैं

इन उपहारों को देख रोज

आँखें गीली हो जाती हैं

तेरी सुधि का अपराध बोध

अब रोज नही सह सकता मैं !

मुझको कर देना माफ़ मगर

ये बोझ नही रख सकता मैं….


हूँ सीख रहा जीना तुम बिन

गर मर जाउ परवाह नही

पर तेरे गम मे यूँ खुद को

बर्बाद नही कर सकता मैं

मुझको कर देना माफ़ मगर

ये बोझ नही रख सकता मैं……..



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

731 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran