Ashutosh_Shukla

मिल जाती तुम मुझको तो मैं कवि ना बनता..

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तेरी याद आयी तो

Posted On: 29 Mar, 2014 कविता,Entertainment,Hindi Sahitya में

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तेरी याद आयी तो
आँखें नम कर लिया
दिन बिताने को ये ही
जतन कर लिया
सोचा था एक दिन
सब सुलझ जाएगा

लेकिन….

तूने हर एक रिश्ता
ख़तम कर लिया…
तेरी याद आयी तो
आँखें नम कर लिया….(१)


index

पर मेरे गीत अब भी
हैं तेरे लिए,
तू मेरी ना सही
पर मैं तेरे लिए
हंस के हर इक सितम
यूँ ही सह जाता मैं

पर….


तूने  खुद  मुझपे ही
ये सितम कर दिया..
तेरी याद आयी तो
आँखें नम कर लिया …(२)



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

March 29, 2014

पर मेरे गीत अब भी हैं तेरे लिए, तू मेरी ना सही पर मैं तेरे लिए हंस के हर इक सितम यूँ ही सह जाता मैं bahut bhavnatmak abhivyakti .

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 30, 2014

    धन्यवाद शालिनी जी…

sanjay kumar garg के द्वारा
March 31, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति! आदरणीय शुक्ला जी!

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 31, 2014

    बहुत आभार संजय सर! कृपया ये ‘आदरणीय’ शब्द कहके शर्मिंदा न करें…

sanjeevtrivedi के द्वारा
April 1, 2014

बहुत सुन्दर शुक्ला जी….

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    April 2, 2014

    धन्यवाद संजीव जी…

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 3, 2014

पहली बार आपकी रचना पढ़ी ,दिल को छूने वाली पंक्तियाँ ,बहुत सुंदर ज़ज्वाती अभिव्यक्ति ,लिखते रहें ,शुभ कामनाएं ,आशुतोषजी .

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    April 3, 2014

    बहुत आभार आदरणीय ‘निर्मला मैम’ बहुमूल्य समय देने के लिए….आगे भी प्रोत्साहित करती रहिये….

deepak pande के द्वारा
April 5, 2014

तेरी याद आयी तो आँखें नम कर लिया दिन बिताने को ये ही जतन कर लिया सोचा था एक दिन सब सुलझ जाएगा वाह बहुत खूब आशुतोष जी

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    April 5, 2014

    बहुत धन्यवाद दीपक जी ब्लॉग पर आने के लिए….समय देते रहिये…

Aakash Tiwaari के द्वारा
April 6, 2014

आशुतोष जी, बहुत पसंद आयी मुझे आपकी ये रचना.. मेरी तरफ से 4 लाइन …. ” तुझसे जुडी हर यादों को सीने में दफ़न कर लिया, खुद ही अपने जख्मो पर हमने मरहम भर लिया, मिटा के अपनी हस्ती अब आवारा सा फिरता हूँ, तेरी याद आयी तो आँखों को नम कर लिया”… =आकाश तिवारी=

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    April 6, 2014

    बहुत धन्यवाद आकाश जी…..आपकी पंक्तियों से सिखने को मिला… प्रतिक्रिया देने के लिए आभार…आगे भी प्रोत्साहन की उम्मीद…

Alka के द्वारा
April 8, 2014

आशुतोष जी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति | तू ना सही पर मैं तेरे लिए…..खूब कहा है .. बहुत बधाई ..

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    April 9, 2014

    धन्यवाद अलका मैम…

Vina के द्वारा
July 12, 2016

Shoot, who would have thughot that it was that easy?

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Hahaha….Yes “Vina” …everything is really simple if you think it simply.. Keep Commenting…keep visiting


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