Ashutosh_Shukla

मिल जाती तुम मुझको तो मैं कवि ना बनता..

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काश तुम इसे सुन पाती..

Posted On: 16 Mar, 2014 कविता,Entertainment,Hindi Sahitya में

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मै ह्रदय तुम्हारे जा पाऊँ
तो देख लूँ इतना..
वहाँ क्या और है कोई?
जो प्यारा है तुम्हे इतना..

जो तुमको टूट के चाहे,
हमेशा बस तुम्हे सोंचे..
कि तेरा साथ पाने को
क्या काफी है नहीं इतना?

Miss You


कि तेरा साथ पाने को
पड़ेगा और करना क्या?
कि ये दूरी मिटाने को
पड़ेगा और करना क्या?

कि मेरी आरजू अब तुम
ही बनकर रह गयी रहबर
तेरे बिन जिंदगी है क्या
बिना तेरे है मरना क्या?

कि इस मगरूरियत को दिल से
इक दिन फेंक कर देखो,
तड़प कि आग में तुम भी
सनम दिल सेंक कर देखो
न हो जाये तुम्हे भी इश्क़ तो
कहना मेरे दिलबर…
कि मेरी आँख से अपने
नयन तुम देख कर देखो..



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
March 22, 2014

aashutosh jee bahut achhee bhavabhivyakti

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 22, 2014

    समय देने के लिए बहुत धन्यवाद ‘यमुना’ मैम….

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 22, 2014

    आप अनुभवी लोगों का प्रोत्साहन उत्साह और आत्मविश्वाश जगाता है ..प्रोत्साहित करती रहिये..

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 22, 2014

    आभार योगी जी… आपका ब्लॉग पढ़ा, काफ़ी दार्शनिक हैं..

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 22, 2014

    ऐसे ही प्रोत्साहित करते रहिये..समय देने के लिए धन्यवाद…

Retta के द्वारा
July 12, 2016

This forum needed shiakng up and you’ve just done that. Great post!

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Thank you so much for compliment…Keep visiting.


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