Ashutosh_Shukla

मिल जाती तुम मुझको तो मैं कवि ना बनता..

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मैं, तुम और कलम..

Posted On: 22 Feb, 2014 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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एक अरसा हो गया..

मेरी क़लम और तुम्हारी बातें हुए.

हालाकी दिल तो रोज करता है बातें..

तुमसे, तुम्हारी यादों से, तुम्हारे सपनों से,

करे भी तो क्या? कुछ कह भी तो नही सकता

ना तुमसे, और ना ही अपने अपनों से..

सोचता हू क्या तुम्हे भी याद आता है वो सब?

वो दिन..जब मेरे हर पल पे

सिर्फ़ तुम्हारा हक़ होता था..

वो रातें, जब ख्वाबों की सवारी सिर्फ़ तुम्हारे पास रुकती थी..

और तुम्हे भी साथ लेके, निकल पड़ती थी एक सुहाने सफ़र पर..

वो भी क्या पल थे ना?

तब सपने भी सिर्फ़ सुहाने आते थे..

अब तो सपनो से भी डर सा लगता है..

क्यों?? तुम तो जानती ही हो..

ashutosh



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378 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pratima gupta के द्वारा
February 28, 2014

टूटे हुए दिल की आवाज………

    Lucinda के द्वारा
    July 12, 2016

    I actually found this more enanttrieing than James Joyce.

pratima gupta के द्वारा
February 28, 2014

टूटे हुए दिल की आवाज……..

    Coralee के द्वारा
    July 12, 2016

    At last! Something clear I can unnerstadd. Thanks!

pratima gupta के द्वारा
February 28, 2014

दिल की आवाज…….

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..बधाई..सादर..

Ashutosh Shukla के द्वारा
February 28, 2014

सही पहचाना प्रतिमा जी..समय देने के लिए आभार..

Ashutosh Shukla के द्वारा
February 28, 2014

साभार धन्यवाद शिल्पा जी…आगे भी प्रोत्साहित करती रहिये…

drsg3 के द्वारा
March 27, 2014

bhavatmak prastuti ke lie hardik badhaiji

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    March 27, 2014

    धन्यवाद शुशीला जी..(drsg3)

Lucka के द्वारा
July 12, 2016

I really appiacrete free, succinct, reliable data like this.

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Thank you so much “Lucka”

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Thank you Lucka


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