Ashutosh_Shukla

मिल जाती तुम मुझको तो मैं कवि ना बनता..

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तन्हाई..

Posted On: 9 Feb, 2014 कविता,Hindi Sahitya में

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कोई नही था अपना यहाँ..

मेरी यादेंमेरी बातें बाँटने को..

मेरा हाल पूछने कोमुझे डाँटने को

फिर एक दिन वक्त का पन्ना पलटा..

और तुम मिली..मेरा दर्द बाँटने को

अभी कुछ ही दिन तो हुए..

पर जाने क्यू लगता है जैसे..

बरसों से जानता हू तुम्हे..

क्यूँ अपनी सी लगने लगी तुम..

खुद को मेरी कमज़ोरी बनाने को????

पर सुकून भी तो मिलता है मुझे..

आख़िर तुम जो हो

मेरी तनहाईयाँ मिटाने को



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

drvandnasharma के द्वारा
February 9, 2014

सुंदर रचना , मार्मिक अभिव्यक्ति

Ashutosh Shukla के द्वारा
February 10, 2014

साभार धन्यवाद ..वंदना जी..

drsg3 के द्वारा
March 27, 2014

BAHहू कपददव

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Change the language option before posing please.. @drsg3

Liliam के द्वारा
July 12, 2016

YMMD with that anserw! TX


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