Ashutosh_Shukla

मिल जाती तुम मुझको तो मैं कवि ना बनता..

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कुछ दिन पहले

Posted On: 9 Feb, 2014 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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सोचू मै क्यू रूठ गये

जो  जान छिड़कते थे हम पे

दो रूह जो अब टकराती नही

थी एक अभी कुछ दिन पहले..

ये नयन जो हैं तरसा करते

उन दो नयनो के दर्शन को,

जो करते थे दीदार हमेशा प्रियतम का

कुछ दिन पहले…..

कितना कोमल स्पर्श था उन अधरो का जब,

बिन माँगे मोहब्बत मिलती थी

बस अभी अभी कुछ दिन पहले…

ये अधर जो हैं तरसा करते

उन दो अधरो के चुंबन को,

वो लट जो थी उलझी रहती

सुलझाने को उनकी उलझन को,

स्पर्श  प्रथम उन अधरो का

था मिला मुझे एक उपवन मे,

दिल अब भी नही भूला है उसे

ना भूलेगा इस जीवन मे

मन मेरा नही उनका भी यही

कहता होगा मन ही मन मे

फिर क्यू करते हैं दिखावा वो

उस दूरी की जो है ही नही

वो आज भी मेरे हैं

और कल भी बस मेरे ही रहेंगे

जो मेरे थे बस मेरे थे

कुछ दिन पहले कुछ दिन पहले….

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Cheyanna के द्वारा
July 12, 2016

Why do I bother calnlig up people when I can just read this!

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    wohoo….really I’m thankful of you for such a nice compliment…’Cheyanna’… Keep visiting..for upcoming post.. or you can like my FB page for latest updates on http://www.facebook.com/kuchkehdo

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Thanks a lot for ur compliment… Keep visiting.

Marylouise के द्वारा
July 12, 2016

Wow! Great to find a post kncoikng my socks off!

    Ashutosh Shukla के द्वारा
    October 6, 2016

    Thanks a lot Marylouise…Keep visiting..keep commenting..


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